Raj Bhasha

 

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द्विवेदी जी सरल और सुबोध भाषा लिखने के पक्षपाती थे। उन्होंने स्वयं सरल और प्रचलित भाषा को अपनाया। उनकी भाषा में न तो संस्कृत के तत्सम शब्दों की अधिकता है और न उर्दू-फारसी के अप्रचलित शब्दों की भरमार है वे गृह के स्थान पर घर और उच्च के स्थान पर ऊँचा लिखना अधिक पसंद करते थे। द्विवेदी जी ने अपनी भाषा में उर्दू और फारसी के शब्दों का निस्संकोच प्रयोग कियाकिंतु इस प्रयोग में उन्होंने केवल प्रचलित शब्दों को ही अपनाया।

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मैं हिंदी के जरिए प्रांतीय भाषाओं को दबाना नहीं चाहता किंतु उनके साथ हिंदी को भी मिला देना चाहता हूं ।

भारत में स्‍वतंत्रता के बाद संसदीय लोकतंत्र लगातार मजबूत हुआ है। भारतीय लोकतंत्र विश्‍व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है जहां अनेक जातियों धर्मों और भाषाओं के बावजूद सबको बराबरी का हक मिला है। जहां स्‍त्री पुरुषों के बीच कोई असमानता नहीं है बल्कि भारत में महिलाएं जीवन के सभी क्षेत्रों में शीर्ष पर पहुंची हैं और हर क्षेत्र में वे अपनी क्षमता का प्रदर्शन करने में सफल रही हैं।

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महादेवी वर्मा का विचार है कि

अंधकार से सूर्य नहीं दीपक जूझता है-

रात के इस सघन अंधेरे में जूझता सूर्य नहीं जूझता रहा दीपक!

कौन सी रश्मि कब हुई कम्पित कौन आँधी वहाँ पहुँच पायी

कौन ठहरा सका उसे पल भर कौन सी फूँक कब बुझा पायी।।

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निज भाषा उन्नति अहैसब उन्नति के मूल

बिन निज भाषा ज्ञान केमिटत न हिय को शूल ।

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प्रेमचन्द उर्दू का संस्कार लेकर हिन्दी में आए थे और हिन्दी के महान लेखक बने। हिन्दी को अपना खास मुहावरा ऑर खुलापन दिया। कहानी और उपन्यास दोनो में युगान्तरकारी परिवर्तन पैदा किए। उन्होने साहित्य में सामयिकता प्रबल आग्रह स्थापित किया। प्रेमचंद से पहले हिंदी साहित्य राजा-रानी के किस्सोंरहस्य-रोमांच में उलझा हुआ था। प्रेमचंद ने साहित्य को सच्चाई के धरातल पर उतारा।

 

  
  

कठिनाइयों का सामना करना ही उनसे छुटकारा पाने का सर्वोत्तम उपाय है.
 

2.   ज्ञान के आधार पर तथ्यों को एकत्रित किया जा सकता है परंतु विवेक से ही उन्हेंसुबोध बनाया जा सकता है.

क्या है ? What's New ? 

 

· राजभाषा केंद्रीय राजभाषा कार्यान्वयन समिति की 37वी बैठक का कार्यवृत

· सचिव (राजभाषा) द्वारा सभी सचिवों को अनुवादकों का कैडर बनाने संबंधी लिखा गया अ.शा. पत्र

· राजभाषा अधिनियम 1963 की धारा 3(3) का अनुपालन

· केंद्र सरकार के मंत्रालयों/विभागों/संघठनों के पुस्तकालयों के लिए 1.1.2012 से 31.12.2012 तक की अवधि में प्रकाशित हिन्दी की स्तरीय पुस्तकों की सूची तैयार करना

· केंद्र सरकार के मंत्रालयों/विभागों/सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों/स्वायत्त निकायों/सरकारी क्षेत्र के बैंकों एवं वित्तीय संस्थाओं के मुख्यालयों द्वारा वर्ष 2012-13 में प्रकाशित हिंदी गृह-पत्रिकाओं के लिए पुरस्कार योजना

· केंद्रीय हिंदी प्रशिक्षण संस्थान, नई दिल्ली में लेखा अधिकारी के पद को प्रतिनियुक्ति पर भरने संबंधी

· केंद्र सरकार के अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित उत्कृष्ट लेखों के लेखकों हेतु पुरस्कार योजना

· मंत्रालय/विभाग के अधीन सभी अधिनस्थ कार्यालयों में राजभाषा अधिकारियों के पदनाम तथा वेतनमान

 

· राजभाषा नीति व नियमों का अनुपालन सुनिश्चित किए जाने के संबंध में

· प्राप्त शिकायती संदर्भों की स्थिति (03.01.2011 to 31.12.2012)